Holi 2020: जानिए होली मनाने का सही तरीका और शुभ मुहूर्त

Holi 2020
जानिए होली मनाने का सही तरीका और शुभ मुहूर्त

Jaipur | Holi 2020 हिन्‍दुओं का प्रमुख त्‍योहार है। इस त्‍योहार को दुनिया भर के अलग-अलग कोनों में रह रहे हिन्‍दू धूमधाम से Holi मनाते हैं। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। Holi के त्‍योहार की शुरुआत बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही हो जाती है। वृंदावन, मथुरा, गोवर्द्धन, नंदगांव, गोकुल और बरसाना की होली मशहूर हैं। बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाती है। होलिका दहन करने से पहले विभिन्न सामग्रियों के साथ होली की पूजा की जाती है।

होलिका दहन सोमवार, मार्च 9, 2020
होलिका दहन मुहूर्त- 06:00pm से 08:27pm
अवधि – 02 घण्टे 27 मिनट्स
रंगवाली Holi 2020 की तिथि- मंगलवार, मार्च 10
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 09, 2020 को सुबह 03:03am
पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 09, 2020 को रात 11:17pm “,

Holi क्‍यों मनाई जाती है?
इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राक्षसों के राजा हिरण्यकश्यप ने तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान लिया कि संसार का कोई भी देवी-देवता, जीव-जन्तु या मनुष्य उसे न मार सके। न रात में मरे, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न बाहर, न कोई शस्त्र उसे मार पाए। हिरण्यकश्यप के प्रह्लाद नाम का एक बेटा हुआ। प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और परमात्मा में अटूट विश्वास करने वाला था।

एक बार हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कहा कि वह उसके अलावा किस अन्य की पूजा न करे। प्रह्लाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने का आदेश दे दिया। उसने प्रह्लाद को मारने के अनेक उपाय किए लेकिन व प्रभु-कृपा से बचता रहा। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से बचने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने का षड्यंत्र रचाया।

होलिका बालक प्रह्लाद को गोद में उठाकर आग में जा बैठी। प्रभु की कृपा से प्रह्लाद को आंच भी नहीं आई और होलिका जल कर भस्म हो गई। इसके बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु नरंसिंह अवतार में खंभे से निकल कर अवतरित हुए। उन्‍होंने दरवाजे की चौखट पर बैठकर हिरण्यकश्यप को मार डाला। इसी तरह अत्याचारी का विनाश हुआ और तभी से होली का त्योहार मनाया जाने लगा।

    Holi 2020 की पूजा…

  • पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठना चाहिए।
  • पूजा सामग्री: जल, माला, रोली, गंध, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, नारियल आदि। इसके अलावा नई फसल के धान्यों जैसे पके चने की बालियां व गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती हैं।
  • इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल तथा खिलौने को रखा जाता है।
  • इसके बाद कच्चे सूत्र लें उसे होलिका के चारों तरफ तीन या 7 परिक्रमा करते हुए लपेटे।
  • इसके बाद लोटे में भरे हुए शुद्ध जल व अन्य सभी सामग्रियों को एक एक करते होलिका को समर्पित करें।
  • इसके बाद गंध पुष्प का प्रयोग करते हुए पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन करें।
  • होलिका दहन के बाद उसकी अग्नि में कच्चे आम, भुट्टे, नई फसल के कुछ भाग की आहुति दी जाती है।
  • Holi की भस्म घर में लाकर रख लें। होलिका की विभूति की वंदना कर उसे अपने शरीर पर लगा लेना चाहिए।
  • फिर घर के आंगन में चौकोर मण्डल बनाना चाहिए और उसमें पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

Holi 2020
जानिए होली मनाने का सही तरीका और शुभ मुहूर्त

मुख्‍य रूप से यह त्‍योहार दो दिन का होता है। पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। इस पर्व के पहले दिन जलाने वाली होली, छोटी होलिका दहन के नाम से जाना जाता है।

अगले दिन Holi का मुख्‍य त्‍योहार मनाया जाता है, जिसको रंगों वाली होली कहते हैं। इस दिन लोग सफेद रंग के कपड़े पहनकर एक-दूसरे को गुलाल का टीका लगाते हैं। छोटे बच्‍चे पिचकारी, गुब्‍बारों और पानी से होली खेते हैं। इस दिन लोग चंग के संगीत पर खूब नाचते हैं।

हमारी ओर से आप सभी को होली की ढेरों शुभकामनाएं!

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